Saturday, October 10, 2009

giddha



बढ़ते पर्यावार्नीय खतरे से संकट में गिद्दों का अस्तित्व

*ab ab tak darjnon giddo ki prajaati ho gae hai lupt
*गिद्दों ki lupt prajaatiyo ko bachaane ke daawe huae khokhale saabit

लगातार बाद रहे pradushan से pअर्यावरण संकट गहरा गया है. बढते पर्यवार्निया खतरे के संकट से गिद्दों का अस्तित्तव संकट में पड़ गया है. इसी कारण पहाडों पर आने वाले गिद्दोअन व् येअगले की दर्जनों प्रजातियों की संख्या लगातार घटी जा रही है. गिद्दोअन के लगातार घटती संख्या भयंकर संकट की और इशारा कर रही है.
प्रतिवर्ष उच्च व् मध्य हिमालयी क्षेत्रों में गर्मियों व् जादू के महीनों में देसी-विदेसी गिद्दोअन प्रजाति के दर्जनों पक्षी प्रवाश को पहुंचाते हैं. गिद्दोअन प्रजाति में मुखाय्ताया जटायु गिद्दोअन (जिपेतुस बर्बेतुस), येग्य्प्तियाँ गीदड़ (निओफ़्रोने तेर्क्नोप्तेरुस), कला गीदड़ (पेयितेगिपयास मोनेस्तुस), हिमालयन ग्रिफ्फान (जिप्सला हिमालायान्सिस), राज गीदड़ (सर्कोजिप्सुस कलोसुस) व् येअगले प्रजाति के रगड़ उकाब (येअक़ुइल्ल निपल), छोटा जुमिज उकाब (येअक़ुइल्ल रेपेकास), सुनहरा उकाब (येक़ुइल्ल क्रिसेतुस) आदि के सेकारों पक्षी पहरों पर देखे जा सकते हैं. लेकिन बदते पर्यवार्नीय संकट से इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. परयावार्निय प्रदुसान से प्रतिवर्ष दरजनों गीदड़ मारे जाते हैं.
गीदड़ भोजन श्रंखला में सबसे ऊपर आते हैं. गिद्दोअन के लगातार खत्म होने व् भोजन चक्र में शीर्ष में आने के कारण पारिस्थितिक तंत्र भी गदाबदाने लगा है. इस संकट से निपटने के लिए पुरे विश्व में गिद्दोअन को बचने के लिए अभियान चलाया गया है. लेकिन यह सिर्फ प्रयास भर ही दिखाई दे रहा है.
इसेसग्योअन का मानना है की गिद्दोअन के मरे जाने का सबसे बड़ा कारण दिक्लोफानिक सहित कई दवाई है, जो पशुओं में दर्द निवारक, दूद बदने आदि के लिए प्रयुक्त की जाती है. जब पशु मरता है तो इसको गीदड़ खाते हैं. दुसित मंश खाना गिद्दोअन की मौत का प्रमुख कारण है. गिद्दोअन की लगातार घटी संख्या को देखते हुए इसी दावा के प्रयोग कराने में प्रतिबन्ध लगा दिया गया.
सरकार द्वारा दिकोफानिक दावा को प्रतिभंधित कर देने के बाद भी इस दवाई का प्रयोग किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लगातार ग़िद्दोअन की मौत हो रही है. ग़िद्दोअन के मरने का एक कारन प्रयावरण के प्रति जागरूक न होना है. उन्हें जिव जन्तुओं के घटक दुस्परिनाम की कोई जानकारी नही है. पर्वतीय क्षेत्रों पिथोरागढ़, अल्मोरा आधी जिलों में प्रतिवर्ष दर्जनोअ गीदड़ मरे जाते हैं. २००७ में रानीखेत नमक स्थान में ६३ गिद्दा व २००८ में १३ हिमालयी ग़िद्दोअन की मौत जहरीला मांस खाने के कारन मरे गए. यह वह आकडे हैं जो प्रकाश में आए. कई मामले तो प्रकाश में ही नही आते. इसी कारन पहाड़ पर आने वाले ग़िद्दोअन की संख्या में भरी कमी आए है.
ग़िद्दोअन पर सोअध कर रहे गोपाल खत्री ने बताया की गीदड़ विलुप्ति की कगार पर हैं. ग़िद्दोअन की कई प्रजाति आज विलुप्ति के कगार पर है. ग़िद्दोअन की विलुप्ति का प्रमुख कारन प्रयावार्निय प्रदुसान है. अगर समय रहते कोई कारगर कदम नही उठाई गई तो वह दिन दूर नही जब हमे भी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना होगा.

गिद्दा प्रजाति
जटायु गीदड़ (जिपेतुस बर्बेतुस),
एग्य्प्तियन गीदड़ (निओफ़्रोने तेर्क्नोप्तेरुस)
काला गीदड़ (पेयितेगिपयास मोनेस्तुस)
हिमालयन ग्रिफ्फां (जिप्सला हिमालायांसिस),
राज गिद्दा (सर्कोजिप्सुस कलोसुस)

एअगले प्रजाति
रगर उकाब (एअक़ुइल्ल निपल)
छोटा जुमिज उकाब (एअक़ुइल्ल रेपेकास)
सुनहरा उकाब (एक़ुइल्ल क्रिसेतुस)

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