Saturday, September 12, 2009

Abhiyaan





उग्र सवभाव ने बनाया पूर्वी नंदादेवी को सबसे दुर्गम चोटी

अपने उग्र स्वाभाव के कारण पूर्वी नंदादेवी चोटी पर्वतारोहियों के लिए दुर्लभ बनी हुई है. यहाँ अब तक कई अभियान चले लकिन बिरले ही एस चोटी पर चड़ने में सफल हो सके. पूर्वी नंदादेवी अभियान के दौरान दर्जनों पर्वतारोही अपनी जान गवा चुके है.

उत्तराखंड की सबसे दुर्गम चोटी नंदा देवी है. एस चोटी पर पहुचने का दुर्गम सफर परवातारोहियो के लिए आज भी चुनोती बना हुआ है. नंदा देवी का पूर्वी छोर तो आज भी रहस्यमयी बनी हुई है. ७४३४ मीटर उच्चे पूर्वी नंदादेवी चोटी १९३९ में सबसे पहले पोलैंड के परवातारोही दल ने फतह की. ऐडम कपर्निकी के नेतृत्व में जे लेनर, जे बुजांग और डी सेरिंग इस चोटी पर दक्षिणी -पूर्वी छोर से चडे । इसके बाद १९५१ में फ्रेंच परवातारोही दल मुक्य चोटी और पूर्वी नंदा देवी पर फतह करने निकला. टीम लीडर रोजर दुप्लात और गिल्बर्ट तो रास्ते में ही लापता हो गए. कुछ साल बाद इन पर्वतारोहियों को ढूडने की कोशिस की गई लेकिन कोई पता नही चल पाया. प्रसिद्द परवातारोही तेनजिंग नोर्गे ने इस चोटी को माउंट एवरेस्ट से भी खतरनाक चोटी बताया.

एस घटना के २४ साल बाद १९७५ में भारत -फ्रेंच का १३ सदस्यीय सयुक्त परवातारोही दल मुख्य व पूर्वी नंदा देवी अभियान को निकला. लेकिन यह दल असफल रहा. इसके बाद १९८१ में भारतीय सेना ने मुख्य व पूर्वी नंदा देवी पर सफलतापूर्वक चढाई की, लेकिन लौटते समय दल के प्रमुख सदस्य प्रेमजीत लाल,फुदोर्गी, दया चाँद, राम सिंह, लाखा सिंह मारे गए. इस अभियान के बाद १९९१ में भारत-रूस के १४ सदयीय दल ने पूर्वी नंदा देवी पर चड़ने में सफलता पाई. इस अभियान में १० रुसी व ४ भारतीय सदस्य मौजूद थे. २००५ में ९ सदस्यीय इटालियन टीम मार्को पाउलो के नेतृत्व में नंदा देवी (ईस्ट) अभियान में गया. लेकिन अभियान असफल रहा, इस दौरान टीम लीडर मार्को पाउलो मारे गए. २००६ में स्पेन का एक परवातारोही दल चोटी पर चड़ने को निकला, लकिन ख़राब मौसम के कारण दल आधे रास्ते से ही वापस लौट आया. ३१ अगस्त को कुमाऊ रेजिमेंट का २५ सदस्सियीय पर्वतारोही दल दक्षिण -पूर्वी छोर से पूर्वी नंदा देवी अभियान पर निकला, अभियान असफल रहा. इस दल के ५ सदस्य टीम लीडर स्यामल सिन्हा , सूबेदार लाल सिंह, हवालदार मोहन सिंह, लांसनायक सुरेन्द्र सिंह बम मारे गए. इसी साल ४ सदस्यीय परवातारोही दल मौसम बिगड़ने के कारण वापस लौटा.

पर्वतारोही व कई चोटी फतह कर चुके सुमित गोयल ने बताया की किसी भी पर्वत पर चड़ने से पहले उसके स्वभाव को जानना अहम् होता है. पूर्वी नंदा देवी चोटी का स्वभाव सभी हिमालयी चोटियों में सबसे उग्र है. यहाँ हर समय बड़ी तेजी से मौसम बदलता है, जिस कारण इस चोटी में चड़ना आज भी चुनौती बना हुआ है. उन्हने बताया की १९८२ में नंदा देवी के पश्चिमी भाग को अभ्यारण्य घोषित कर दिए जाने के बाद पर्वतारोहियों के लिए दक्षिण पश्चिमी मार्ग बंद कर दिया गया. पहले इस मार्ग से पर्वतारोही पूर्वी नंदा देवी अभियान में जाते थे. मार्ग बंद होने के बाद पर्वतारोही पूर्वी नंदा देवी अभियान के लिए दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी मार्ग का प्रयोग करते है. तीव्र ढलान के कारण यह मार्ग बेहद खतरनाक है.

पूर्वी नंदा देवी चोटी पर प्रमुख अभियान

· १९३९ में पोलैंड के पर्वतारोही दल का सफलतापूर्वक अभियान .

· १९५१ में फ्रेंच पर्वतारोही दल के ३ सदस्य लापता.

· १९७५ में भारत-फ्रांस का सयुक्त पर्वतारोहण असफल.

· १९८१ में भारतीय सेना का अभियान सफल, ५ की मौत

· १९९१ में भारत-रूस का सयुक्त पर्वतारोहण सफल

· २००५ में इटली का पर्वतारोहण असफल

· २००६ में स्पेन का पर्वतारोही दल असफल.

· २००७ में भारतीय सेना का अभियान असफल, ५ की मौत

२००७ इटली का पर्वतारोहण असफल

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